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बाहर निकली नाà¤à¤¿ इस बीमारी का हो सकती है संकेत, à¤à¤¸à¥‡ करें बचà¥â€à¤šà¥‡ की देखà¤à¤¾à¤²
अमूमन यह बीमारी तीन से चार साल में खà¥à¤¦ ठीक हो जाती है।
कई शिशà¥à¤“ं की नाà¤à¤¿ बाहर को निकली हà¥à¤ˆ होती है या सामानà¥à¤¯ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ और बड़ी होती है। इसका कारण अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ हो सकता है। सामानà¥à¤¯à¤¤: शिशà¥à¤“ं में ये समसà¥à¤¯à¤¾ अपने आप ठीक हो जाती है। मगर यदि 3-4 साल की उमà¥à¤° तक à¤à¥€ शिशॠकी नाà¤à¤¿ उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ और बड़ी हो, तो ये अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का संकेत हो सकता है।
शिशॠकी नाà¤à¤¿
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® से पहले शिशॠके विकास के लिठजो à¤à¥€ जरूरी पोषक ततà¥à¤µ चाहिà¤, वो उसे मां दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² से मिलते हैं। ये गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² शिशॠके पेट पर नाà¤à¤¿ वाली जगह से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती है। जनà¥à¤® के बाद शिशॠके साथ ये गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² à¤à¥€ बाहर आ जाती है। जनà¥à¤® के बाद इस नाल को बांधा जाता है और काट दिया जाता है। चूंकि इस नाल में कोई नस नहीं होती है इसलिठशिशॠको दरà¥à¤¦ नहीं होता है। अगर इसे बांधा नहीं à¤à¥€ जाता है, तो सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• रूप से खà¥à¤¦ ही बंद हो जाती है।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾
जनà¥à¤® के 3 साल बाद तक शिशॠके तमाम अंदरूनी अंगों का विकास होता है। à¤à¤¸à¥‡ में अगर कोई आंतरिक अंग शिशॠके पेट में कमजोर हिसà¥à¤¸à¥‡ पर दबाव बनाता है, तो वो हिसà¥à¤¸à¤¾ उà¤à¤° आता है। इसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ कहते हैं। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में ये हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ सामानà¥à¤¯ है मगर बड़ों को à¤à¥€ ये समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ दिनों में 10 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में ये समसà¥à¤¯à¤¾ होती है, जिनमें से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में ये अपने आप ठीक हो जाती है।
ये है इलाज
अगर शिशॠकी उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ नाà¤à¤¿ 3-4 साल की उमà¥à¤° तक ठीक नहीं होती है, तो सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जरूरत पड़ती है। कई बार बचà¥à¤šà¥‡ को इस हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण दरà¥à¤¦ होता है या बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ में समसà¥à¤¯à¤¾ आती है, तो à¤à¥€ सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जरूरत पड़ती है। कई बार बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पेट में दरà¥à¤¦ का कारण आंत में मरोड़ à¤à¥€ हो सकता है इसलिठà¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जरूर संपरà¥à¤• करें।
कैसे हो सकती है जांच
आमतौर पर डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ शिशॠकी नाà¤à¤¿ देखकर अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के बारे में पता लगाते हैं। कई मामलों में à¤à¤•à¥à¤¸-रे और अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इस बात की जांच की जाती है कि अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण शरीर में कोई परेशानी या किसी अंदरूनी अंग का दबाव तो नहीं है। इसके अलावा बà¥à¤²à¤¡ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ या à¤à¤¸à¥à¤•ेमिया की आशंका होने पर खून की जांच à¤à¥€ की जाती है।
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